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maharashtra आवर्जून वाचाच जळगाव नवरात्री

‘महिलाओंके बारे मे राक्षसी सोच तथा कृती का दहन करनेकी जरुरत।’

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जहॉ नारी की पूजा होती है, वहां देवता निवास करते है । किंतु वर्तमान मे जो हालात दिखाई देते है, उसमें नारी का हर जगह अपमान होता चला जा रहा है । उसे ‘भोग की वस्तु’ समझकर आदी ‘अपने तरीके’ से ‘इस्तेमाल’ कर रहा है । यह बेहद चिंताजनक बात है ।

लेकिन हमारी संस्कृती को बनाए रखते हुए नारी का सम्मान कैसे किये जाए इस पर विचार करना आवश्यक है.‘देश की तरक्की के लिये पहले हमे भारत के महिलाओ को सशक्त होंगा’ एक बार जब महिला अपना कदम उठा लेती है, तो परिवार आगे बढता है, गाँव आगे बढता है और राष्ट्र विकास की ओर बढता है ।

भारत मे महिलाओ को सशक्त बनाने के लिये सबसे पहले समाज मे उनके अधिकारो और मूल्यो को मारने वाले उन सभी राक्षसी सोच को मारना जरूरी है, जैसे दहेज प्रथा, यौन हिंसा, अशिक्षा, भ्रूण हत्या, असमानता, महिलाओं के प्रति घरेलू हिंसा, अशिक्षा, कार्य स्थल पर यौन शोषण, बाल मजदूरी,

वैश्यावृत्ती, मानव तस्करी और ऐसे ही दुसरे विषय प्राचीन काल के इतिहास मे नारी का पद परिवार मे अत्यंत महत्त्वपूर्ण या, ग्रहस्ती का कोई भो कार्य उनकी सहमती के बिना नही किया जा सकता था । न केवल धर्म या समाज बल्कि रण क्षेत्र मे भी नारी अपने पति-परिवार का सहयोग करती है ।

– कु.सोनल अर्जून ढगे, मू.जे.महाविद्यालय, जळगाव

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